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जनगणना-2027 की तैयारी तेज: बिहार में घर-घर होगा विस्तृत सर्वे, रसोई से लेकर मकान की बनावट तक दर्ज होगी जानकारी

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पटना। बिहार में आगामी जनगणना-2027 को लेकर सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जनगणना की रूपरेखा, प्रशासनिक तैयारी और तकनीकी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में कई अहम निर्णय लिए गए। साफ संकेत है कि इस बार की जनगणना पारंपरिक आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के रहन-सहन, आवासीय सुविधाओं और संसाधनों की बेहद सूक्ष्म तस्वीर पेश करेगी।
पटना स्थित पुराने सचिवालय में हुई राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक में सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में बताया गया कि जनगणना-2027 दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से जुड़ा होगा, जिसे अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चुने गए 30 दिनों में पूरा किया जाएगा। इस चरण के पूर्ण होने के बाद संबंधित अधिसूचना को राज्य राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे आगे की प्रक्रिया को कानूनी आधार मिलेगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जनगणना की निष्पक्षता और एकरूपता बनाए रखने के लिए भारत सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना लागू रहेगी। इसके तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा या क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। फिलहाल बिहार में 534 ग्रामीण और 265 शहरी प्रशासनिक इकाइयां अधिसूचित हैं, जिनमें एक छावनी परिषद भी शामिल है, और इन्हीं इकाइयों के आधार पर जनगणना कराई जाएगी।
पहले चरण की गणना को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। इस चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें मकानों की स्थिति, उनके उपयोग का स्वरूप, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, परिसंपत्तियां और घरों में उपयोग होने वाले मुख्य अनाज जैसी जानकारियां शामिल होंगी। ये प्रश्न केंद्र सरकार द्वारा 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए जा चुके हैं। इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है, जो अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा।
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी आधार होगा। शुरुआती स्तर से ही जियो-स्पैशियल डेटा और आधुनिक एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के महानिदेशक टी.पी. सिंह के साथ विशेष बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल के तहत बिहार में जियो-स्पैशियल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क, रेल, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शुरुआती स्तर पर सटीक डेटा उपलब्ध होने से भविष्य की कई व्यावहारिक समस्याओं से बचा जा सकता है।
इसी दौरान मुख्य सचिव ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के अध्ययन दल को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 15 से 20 वर्षों में बिहार ने अनेक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव बेहतर प्रशासन, योजनाबद्ध विकास और सुशासन का प्रतिफल है।
सरकार का मानना है कि जनगणना-2027 केवल आबादी गिनने का अभ्यास नहीं होगी, बल्कि यह बिहार के सामाजिक-आर्थिक ढांचे की विस्तृत तस्वीर सामने लाएगी। इसके आधार पर भविष्य की नीतियां, योजनाएं और विकास कार्यक्रम अधिक सटीक और जरूरत के अनुरूप तैयार किए जा सकेंगे।

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